जैविक खेती (Organic Farming) कैसे शुरू करें और भारत में इसके अवसर

 जैविक खेती क्या हे ? (What is Organic Farming?)

जैविक खेती, यह एक कृषि प्रणाली जो पारिस्थितिक रूप से आधारित कीट नियंत्रणों का उपयोग करती है और बड़े पैमाने पर जानवरों और पौधों के शेष अपशिष्ट और नाइट्रोजन प्रदाता फसलों से प्राप्त जैविक उर्वरकों का उपयोग करती है।

जैविक खेती में ऐसा कोई प्रकार का भी कृत्रिम फ़र्टिलाइज़र का उपयोग नहीं किया जाता हे जिस्से हमारे पर्यावरण ,भुमि और जल को प्रदूषित करता हो। 

जैविक खेती को प्रबंधन और कृषि उत्पादन की एक प्रणाली के रूप में परिभाषित किया जा सकता है जो उच्च स्तर की जैव विविधता को पर्यावरणीय प्रथाओं के साथ जोड़ती है और साथ ही यह प्राकृतिक संसाधनों को संरक्षित करती है और पशु एबं मानव कल्याण के लिए भी लाभदायी हैं। 

जैविक खेती के फ़ायदे (Benefits of Organic Farming) 

पारंपरिक कृषि की तुलना में, जैविक खेती कम कीटनाशकों का उपयोग करके किया जाता है। और यह सभी कीटनाशक बायो प्रोडक्ट्स से बनाये जाते हे तथा ये ज़मीन की उर्बरताको बनाये रखने में सहायक होती  है। भूजल और सतही जल में नाइट्रेट की लीचिंग को भी कम करती है जो की आधुनिक कीटनाशकों की प्रयोग से होता हे।  

आजकल जैविक खाद्य बिक्री में लगातार वृद्धि हो रही है। इसका मुख्य कारण अधिक पर्यावरण जागरूकता, कीटनाशकों के अवशेषों के मानव स्वास्थ्य में दुष्प्रभाव इत्यादि हे। 

अन्य लाभों में कृषि चक्र में सुधार, कीटनाशकों और अन्य विदेशी उर्वरकों के आयात में कमी और रोजगार सृजन में वृद्धि भी शामिल है।


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भारत में जैविक खेती का दायरा  (Scope of Organic farming in India)

हमारे भारत में आर्गेनिक फार्मिंग का चलन बहुत पारम्परिक था। पर पिछले काफी अर्सो से यह बहुत कम हो चूका हे।  इसका मुख्य बजह उपजाव माना जाता हे। विशेषज्ञो के अनुसार आर्गेनिक तरीके से उपज लगभग 20-30 प्रतिशत कम देखने को मिलता हे हलाकि यह भी फ़सल ,सीजन और अन्य काफी कारणों पर काफी ज्यादा निर्भर रहता हे। 

भारत में जैविक खेती उत्पाद एबं ख़पत का दायरा तेज़ी से बढ़ रहा है। इस विशाल परिवर्तन के लिए स्वास्थ्य के प्रति जागरूकता एक महत्वपूर्ण कारक है। और कृषि के क्षेत्र में किए गए नए शोध और तकनीक की बजह भी हे।  इन कारणों के अलावा, फलों और सब्जियों के कृत्रिम उत्पादन से उत्पन्न होने वाली विभिन्न नई बीमारियों की बजह से लोगों के मन को जैविक उत्पादों की ओर स्थानांतरित होने के लिए मजबूर कर दिया है।

बाजार में उच्च मांग के कारण आर्गेनिक फार्मिंग बिज़नेस भारत में कई नए उद्यमियों के लिए अवसर खोलता है। स्थापना लागत और रखरखाव बेहद कम है क्योंकि इस पद्धति में खेती के लिए कृत्रिम उत्पादों का उपयोग शामिल नहीं है।

जैविक खेती कैसे शुरु करें ?(How to start organic farming in India)

आज के युवा लड़के जैविक खेती में अधिक रुचि दिखा रहे हैं। अभी भी इसमें कार्यप्रणाली, तकनीकों और उत्पादन सीमाओं के बारे में बहुत सारी चुनौतियाँ और भ्रम हैं।जैविक खेती करने के लिए आवश्यक संसाधन, अनुमोदन और प्रमाणपत्र नीचे संक्षेप में दिए गए हैं।

बुनियादी आवश्यकताएं हैं भूमि, मवेशी और जल संसाधन। इन तीन प्राथमिक तत्वों से आप आसानी से खेती की प्रक्रिया शुरू कर सकते हैं।

मवेशियों को उर्वरकों के लिए मुख्य तत्व माना जाता है। उनके जैव अपशिष्ट का उपयोग उर्वरकों के रूप में किया जाता है।और कीटनाशकों के लिए आम तौर पर नीम के तेल जैसे प्राकृतिक कीटनाशकों का उपयोग किया जाता है।

जैविक उत्पादों की बिक्री के लिए नीचे दिए गए प्रमाणपत्रों की आवश्यकता होती है जिन्हें आप ऑनलाइन आवेदनों के माध्यम से बहुत आसानी से प्राप्त कर सकते हैं।

FSSAI License: भारतीय खाद्य सुरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI लाइसेंस) ने जैविक उत्पादों पर लेबल लगाना अनिवार्य कर दिया है। FSSAI कई नियम और कानून जारी करता है जिनका पालन उन खाद्य कंपनियों द्वारा किया जाना चाहिए जो जैविक उत्पाद बेच रही हैं।

Organic Cerification: जैविक खाद्य उत्पादन एबं व्यवसाय के लिए किसी एक प्राधिकरण द्वारा प्रमाणीकरण की आवश्यकता होती है। National Program for Organic Production (NPOP) and Participatory Guarantee System for India (PGS-India) मुख्यत यह दो संस्थान हे जो यह सर्टिफिकेट प्रदान करता हे। 

अन्य दस्तावेज़ जैसे की GST, MSME ,इंडिया ऑर्गनिक ,एगमार्क ,ISO सर्टिफिकेशन के लिए भी आवेदन कर सकते हे जो की आपके यह ब्यबसाय के लिए काफी बेहतर होंगे। 



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